“आज की भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को राजनीति में युवाओं की जरूरत है” इस बात का अर्थ यह है कि आज की घटिया भारतीय राजनीति को सक्रिय रूप से युवा पीढ़ी की भागीदारी, उनके नए विचारों, भागीदारी , ऊर्जा और दृष्टिकोण की अत्यंत आवश्यकता है ताकि देश के शासन और विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण और सकारात्मक बड़ा बदलाव लाया जा सके। यह केवल मात्र एक इच्छा नहीं है, बल्कि देश की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए यह एक अत्यावश्यक आवश्यकता बन गई है। भारत विश्व का सबसे बड़ा युवा शक्ति का देश है, जिसकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु का है जो विश्वविजय के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है | ऐसे में, यदि देश की राजनीति में इस बड़े वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तो नीतियां और निर्णय उनके हितों और आकांक्षाओं को सही ढंग से संगृहीत और संचालन या संबोधित नहीं कर पाएंगे।
🌟 राजनीति में युवाओं की आवश्यकता के प्रमुख कारण
भारतीय राजनीति में युवाओं की भागीदारी को बढ़ाने की ज़रूरत निम्नलिखित कारणों से है:
1. नई सोच, नई ऊर्जा और नवाचार (New Perspective, Energy, and Innovation)
- परिवर्तनकारी दृष्टिकोण: युवा पीढ़ी शिक्षा (Educated), प्रौद्योगिकी (Technology) और वैश्वीकरण (Globalization) के युग में पली-बढ़ी है। उनके पास समस्याओं को हल करने का एक नया, आधुनिक और समावेशी दृष्टिकोण होता है, जो पुरानी, पारंपरिक सोच से हटकर होता है।
- ऊर्जा और उत्साह: युवा जोश, उत्साह और काम करने की अदम्य ऊर्जा से भरपूर होते हैं। वे निष्क्रियता और यथास्थिति (Status Quo) को चुनौती देने का साहस रखते हैं, जो राजनीतिक गतिशीलता (Political Dynamism) के लिए ज़रूरी है।
- नवाचार: वे प्रशासन और नीति निर्माण में डिजिटल समाधान (Digital Solutions), पारदर्शिता (Transparency) और नवीनतम कार्यप्रणाली (Modern Work Methods) लाने में सहायक हो सकते हैं।
2. वंशवाद और भ्रष्टाचार पर अंकुश (Curbing Dynastic Politics and Corruption)
- भाई-भतीजावाद से मुक्ति: भारतीय राजनीति में लंबे समय से वंशवादी राजनीति (Dynastic Politics) हावी रही है, जहां पद योग्यता के बजाय परिवार के आधार पर मिलते हैं। युवा, जो अक्सर किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं होते, इस चक्र को तोड़कर योग्यता-आधारित (Merit-based) राजनीति ला सकते हैं।
- भ्रष्टाचार का मुकाबला: नए और ईमानदार युवा नेताओं में भ्रष्टाचार (Corruption) और अपराधीकरण (Criminalization) जैसी सदियों पुरानी समस्याओं को चुनौती देने की प्रबल इच्छा होती है। वे एक पारदर्शी और जवाबदेह (Accountable) व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में काम कर सकते हैं।
3. प्रासंगिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना (Focusing on Relevant Issues)
- जनसंख्या का प्रतिनिधित्व: चूंकि युवा देश की सबसे बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनका राजनीति में होना यह सुनिश्चित करता है कि बेरोज़गारी, शिक्षा सुधार, मानसिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और कौशल विकास (Skill Development) जैसे उनके अपने प्रासंगिक मुद्दे राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आएं।
- नीतियों का निर्माण: युवा अपने अनुभवों के आधार पर ऐसी नीतियां बनाने में मदद कर सकते हैं जो आज के दौर की वास्तविक चुनौतियों का समाधान करती हों, न कि केवल पिछली पीढ़ियों की समस्याओं का।
4. लोकतंत्र की गुणवत्ता और गतिशीलता (Quality and Dynamism of Democracy)
- जवाबदेही: युवा राजनीतिज्ञ अपने मतदाताओं से सीधे जुड़ने और सोशल मीडिया जैसे नए माध्यमों का उपयोग करके उच्च स्तर की जवाबदेही बनाए रखने में अधिक सहज होते हैं।
- लोकतंत्र में विश्वास: जब युवा देखते हैं कि उनके जैसे लोग सत्ता में हैं, तो उनका लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बढ़ता है और वे भी मतदान तथा अन्य राजनीतिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय होते हैं।
🎯 वर्तमान चुनौतियां और आगे का रास्ता
युवाओं के राजनीति में आने की आवश्यकता तो है, लेकिन इसमें कई बड़ी चुनौतियां भी हैं:
- राजनीतिक दलों का रवैया: बड़े राजनीतिक दल अक्सर पुराने चेहरों पर ही भरोसा दिखाते हैं और युवाओं को केवल प्रचार या जमीनी काम तक सीमित रखते हैं। उन्हें टिकट देने से वे कतराते हैं।
- वित्तीय बाधाएं: चुनाव लड़ना बहुत महंगा होता जा रहा है। पर्याप्त वित्तीय समर्थन के बिना, एक आम युवा के लिए राजनीति में सफल होना मुश्किल है।
- अपराधीकरण और नकारात्मकता: राजनीति में व्याप्त नकारात्मकता, अपराधीकरण और नैतिक पतन का माहौल कई सक्षम और ईमानदार युवाओं को इससे दूर रखता है।
- जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी: कई युवाओं में राजनीतिक प्रक्रियाओं की पर्याप्त समझ और नेतृत्व के लिए आवश्यक प्रशिक्षण की कमी होती है।
इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
- राजनीतिक दलों द्वारा कोटा: राजनीतिक दलों को सक्रिय रूप से 40 वर्ष से कम आयु के लोगों को टिकट देने के लिए एक निश्चित कोटा (Quota) लागू करना चाहिए।
- राजनीतिक शिक्षा: स्कूल और कॉलेज के स्तर पर नागरिक शास्त्र और राजनीतिक भागीदारी की शिक्षा को मजबूत करना चाहिए।
- नेतृत्व विकास कार्यक्रम: सरकार और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा युवाओं को नेतृत्व कौशल, नीति निर्माण और चुनावी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देने के लिए कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।
- पारदर्शिता: चुनाव फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना और चुनाव खर्च की सीमा को तर्कसंगत बनाना आवश्यक है ताकि एक आम आदमी भी चुनाव लड़ सके।
📝 निष्कर्ष
भारत अपनी युवा शक्ति के साथ विश्व पटल पर एक बड़ी ताकत बनने की दहलीज पर खड़ा है। इस क्षमता को पूरी तरह से साकार करने के लिए, भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को सक्रिय रूप से युवाओं को न केवल मतदाता के रूप में, बल्कि नीति-निर्माता और नेतृत्वकर्ता के रूप में शामिल करना होगा।
युवाओं की जरूरत इसलिए है क्योंकि वे कल की आशा हैं, आज की ऊर्जा हैं, और देश के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण निवेश हैं। उनका प्रवेश भारतीय राजनीति को स्वस्थ, गतिशील, आधुनिक और देश की 1.4 अरब आबादी की वास्तविक आकांक्षाओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएगा।
“युवा जोश और अनुभवी ज्ञान के मेल से ही एक मजबूत और प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण संभव है।” क्या आप भारतीय राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानना चाहेंगे?
